Raksha Bandhan 2026 Date & Shubh Muhurat | रक्षाबंधन 2026: 28 अगस्त शुभ मुहूर्त, भद्रा काल समय, पूजा विधि व पौराणिक कथाएं

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📅 रक्षाबंधन 2026 विशेषांक (बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग)

📌 प्रस्तावना: रक्षाबंधन 2026 (28 अगस्त 2026) का प्रामाणिक महात्म्य

सनातन हिंदू वैदिक परंपरा में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) भाई-बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास, रक्षा के वचन और सांस्कृतिक मर्यादा का सबसे पावन पर्व है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई और बहन के अटूट रिश्ते को आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ करता है। विक्रम संवत 2083 तथा शक संवत 1948 की खगोलीय गणनाओं के अनुसार पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग 2026 के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन का त्यौहार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को अत्यंत हर्षोल्लास और शास्त्रोक्त विधि से मनाया जाएगा।

सनातन धर्मग्रंथों—जैसे निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु, मुहूर्त चिंतामणि और स्कंद पुराण—में स्पष्ट निर्देश है कि रक्षाबंधन का पर्व हमेशा उदया तिथि पूर्णिमा तथा भद्रामुक्त काल (भद्रा रहित समय) में ही मनाया जाना चाहिए। भद्रा काल में रक्षा सूत्र बांधना शास्त्रोक्त रूप से अशुभ और अनिष्टकारी माना जाता है। बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की खगोलीय गणना के अनुसार इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को प्रातः 09:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 को प्रातः 09:48 बजे समाप्त होगी। भद्रा काल 27 अगस्त की रात्रि में ही समाप्त हो जाएगा, जिससे 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) का सूर्योदय भद्रामुक्त रहेगा और उदया तिथि पूर्णिमा में रक्षाबंधन मनाना शास्त्रसम्मत और परम कल्याणकारी रहेगा।

यदि आप रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त के दिन राखी बांधने का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, भद्रा काल की स्थिति, चौघड़िया मुहूर्त, थाली सजाने की शास्त्रीय पूजा विधि, रक्षा सूत्र का वैदिक मंत्र, पौराणिक कथाएं या अपने भाई की राशि के अनुसार राखी का रंग जानना चाहते हैं, तो इस 8000+ शब्दों के अति-विस्तृत और प्रामाणिक महा-लेख में आपको बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार संपूर्ण सटीक जानकारी प्राप्त होगी।

⚡ Raksha Bandhan 2026: AI Quick Highlights (मुख्य बिंदु)

  • सही तिथि (Exact Date): रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को उदया तिथि एवं बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार सर्वमान्य रूप से मनाया जाएगा।
  • पूर्णिमा तिथि समय: श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त 2026 को प्रातः 09:08 AM पर प्रारंभ होगी तथा 28 अगस्त 2026 को प्रातः 09:48 AM पर समाप्त होगी।
  • राखी बांधने का मुख्य मुहूर्त: 28 अगस्त 2026 को प्रातः सूर्योदय से प्रातः 09:48 AM तक (शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि पूर्णिमा काल)।
  • भद्रा काल स्थिति: भद्रा काल 27 अगस्त की रात्रि में समाप्त हो जाएगा, अतः 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पूरा दिन भद्रामुक्त रहेगा!
  • वैदिक रक्षा मंत्र: “येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 01)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 02)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 03)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 04)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 05)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 06)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 07)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 08)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 09)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 10)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 11)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 12)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 13)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 14)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 15)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

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📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 16)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 17)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 18)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 19)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 20)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 21)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 22)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 23)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 24)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 25)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 26)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 27)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 28)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 29)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 30)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) रक्षाबंधन विशेष पंचांग व खगोलीय विवरण (अध्याय 31)

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक खगोलीय गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:56 AM पर होगा और सूर्यास्त सायं 06:48 PM पर होगा। 28 अगस्त को प्रातः 09:48 AM तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, तत्पश्चात भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ होगा। शास्त्रों का विधान है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है (उदया तिथि), पूरा दिन उसी तिथि का मान माना जाता है। इसलिए 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व उदया तिथि पूर्णिमा के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

इस पावन दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी रहेगी, जो भगवान श्री हरि विष्णु का निज नक्षत्र माना गया है। योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग तथा अतिगण्ड योग का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। दिन का करण बालव तथा कौलव रहेगा। चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान रहेगा तथा सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में गोचर करेगा। इस राजयोग रूपी ग्रह स्थिति में रक्षा सूत्र बांधने से भाइयों के जीवन में आरोग्य, दीर्घायु, धन-धान्य और पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है।

📅 बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग 2026: रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026) तिथि व सटीक शुभ मुहूर्त तालिका

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ और समापन समय, भद्रा काल की स्थिति और राखी बांधने के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त की प्रामाणिक समय सारणी नीचे दी गई है:

पंचांगीय विवरण (Panchang Details) तारीख एवं शास्त्रीय समय (Exact Timings) महत्व व शास्त्रीय टिप्पणी (Significance)
रक्षाबंधन की सही तिथि (Exact Date) 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि (उदया तिथि)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 27 अगस्त 2026 को प्रातः 09:08 AM से श्रावण पूर्णिमा तिथि का आरंभ
पूर्णिमा तिथि समाप्त 28 अगस्त 2026 को प्रातः 09:48 AM तक उदया तिथि के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन
भद्रा काल स्थिति (Bhadra Kaal) 27 अगस्त रात्रि को समाप्त (28 अगस्त भद्रा मुक्त) 28 अगस्त को पूरा दिन भद्रारहित व अत्यंत शुभ
राखी बांधने का सर्वोत्तम मुहूर्त 28 अगस्त प्रातः 05:56 AM से प्रातः 09:48 AM तक उदया तिथि पूर्णिमा काल में राखी बांधने का मुख्य मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Time) दोपहर 11:57 AM से दोपहर 12:47 PM तक सर्वार्थ सिद्धि मुहूर्त (प्रतिपदा तिथि)
चर व लाभ चौघड़िया मुहूर्त प्रातः 05:56 AM से प्रातः 09:05 AM तक अमृत व शुभ चौघड़िया में राखी बांधने का मुहूर्त

⚠️ भद्रा काल विचार और शास्त्रीय नियम (Bhadra Kaal Rules & Timing):

सनातन धर्मग्रंथों में भद्रा काल को अत्यंत उग्र, पाताल वासिनी और विनाशकारी माना गया है। मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार: “भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।” अर्थात भद्रा काल में दो धार्मिक कार्य कभी नहीं करने चाहिए—पहला श्रावणी (रक्षाबंधन पर राखी बांधना) और दूसरा फाल्गुनी (होलिका दहन करना)। पौराणिक मान्यता है कि लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके कारण एक वर्ष के भीतर रावण के संपूर्ण कुल का विनाश हो गया था।

इसलिए पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग में भद्रा काल का सूक्ष्मता से विचार किया जाता है। वर्ष 2026 में 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ ही भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 27 अगस्त की रात्रि को ही समाप्त हो जाएगा। अतः 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को सूर्योदय के समय भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। बहनें 28 अगस्त को प्रातः सूर्योदय से ही बिना किसी संशय के अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।

🕉️ रक्षाबंधन की शास्त्रीय पूजा विधि एवं रक्षा सूत्र बांधने का संपूर्ण विधान

रक्षाबंधन के पावन दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन पर राखी बांधने की पूरी शास्त्रीय विधि इस प्रकार है:

1. पूजा की थाली सजाना (Rakhi Thali Decoration):

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (अधिमानतः पीले, लाल या गुलाबी रंग के) धारण करें। इसके बाद पीतल, तांबे या चांदी की थाली में निम्नलिखित पवित्र सामग्री सजाएं:

  • अक्षत (अखंडित चावल): भाई के जीवन में पूर्णता, अखंड सौभाग्य और समृद्धि के लिए।
  • रोली या कुमकुम व चंदन: आज्ञा चक्र (माथे) पर विजय और आरोग्य का तिलक लगाने के लिए।
  • दीपक (गाय के शुद्ध घी का): भाई की आरती उतारने और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए।
  • पवित्र रक्षा सूत्र (राखी): सूती, रेशमी या कलावा से बनी मांगलिक राखी।
  • शुद्ध मिष्ठान: बेसन के लड्डू, घेवर, पेड़ा या काजू कतली।
  • श्रीफल (नारियल) व दूर्वा: मंगल कार्य और भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए।

2. प्रथम पूज्य गणेश जी व इष्टदेव को राखी अर्पित करना:

थाली सजाने के बाद सबसे पहले घर के मंदिर में भगवान श्री गणेश, भगवान श्री हरि विष्णु और अपने इष्टदेव को राखी अर्पित करें। इससे रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह सिद्ध और कल्याणकारी हो जाता है।

3. भाई को बैठाने की सही दिशा (Seating Direction Rules):

शास्त्रों के अनुसार भाई को हमेशा पूर्व दिशा (East) या उत्तर दिशा (North) की ओर मुख करके बैठाना चाहिए। बहन का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो सकता है। भाई के सिर पर एक स्वच्छ रुमाल या वस्त्र अवश्य होना चाहिए, खाली सिर तिलक नहीं लगाना चाहिए।

4. तिलक, आरती एवं राखी बांधने का वैदिक मंत्र:

सबसे पहले भाई के माथे पर दाहिने हाथ के अंगूठे से रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद दाहिने हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए इस पावन वैदिक मंत्र का उच्चारण करें:

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

मंत्र का अर्थ: जिस रक्षा सूत्र से अत्यंत प्रभावशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूँ। हे रक्षे! तुम स्थिर रहना, अपने धर्म और वचन से कभी विचलित मत होना और भाई की रक्षा करना।

मंत्रोचार के बाद भाई की घी के दीपक से आरती उतारें, उनका मुंह मीठा कराएं और उन्हें श्रीफल (नारियल) भेंट करें। इसके बाद भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें और अपनी सामर्थ्य अनुसार रक्षा का वचन देते हुए उपहार भेंट करें।

📖 रक्षाबंधन की 4 महान पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथाएं (Pauranik Kathas)

रक्षाबंधन के पावन पर्व के पीछे केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि वेद, पुराण और इतिहास की कई अमर गाथाएं जुड़ी हुई हैं:

1. दैत्यराज बलि और माता लक्ष्मी की पावन कथा (Mata Lakshmi & Raja Bali Katha):

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दानवीर राजा बलि से तीन पग में संपूर्ण त्रिलोक नाप लिया, तो राजा बलि के भक्तिभाव से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उनसे वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने वरदान में मांगा कि भगवान विष्णु रात-दिन उनके सामने पाताल लोक के द्वारपाल बनकर रहें। भगवान विष्णु अपने भक्त का वरदान टाल न सके और पाताल लोक में रुक गए। जब बैकुंठ धाम में माता लक्ष्मी अपने स्वामी के बिना व्यथित होने लगीं, तो महर्षि नारद ने उन्हें एक उपाय बताया।

माता लक्ष्मी ने एक साधारण स्त्री का रूप धारण किया और पाताल लोक जाकर राजा बलि को रक्षा सूत्र (राखी) बांधा और उन्हें अपना भाई बनाया। राजा बलि ने अत्यंत प्रसन्न होकर अपनी बहन से मनचाहा उपहार मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपने वास्तविक रूप में प्रकट होकर राजा बलि से भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त करने की मांग की। राजा बलि ने अपनी बहन की बात का सम्मान करते हुए भगवान विष्णु को सहर्ष बैकुंठ धाम जाने की अनुमति दी। इसी पावन घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है।

2. देवराज इंद्र और इंद्राणी (शची) की वृत्रासुर वध कथा (Indra & Sachi Katha):

स्कंद पुराण के अनुसार प्राचीन काल में देवासुर संग्राम के दौरान दैत्यराज वृत्रासुर ने देवराज इंद्र को युद्ध में पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। दुखी होकर देवराज इंद्र गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। गुरु बृहस्पति ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन रक्षा विधान करने का परामर्श दिया। इंद्र की पत्नी इंद्राणी (शची) ने मंत्रों से अभिमंत्रित करके एक रेशमी रक्षा सूत्र तैयार किया और देवराज इंद्र की कलाई पर बांधा। इस रक्षा सूत्र के प्रभाव से इंद्र ने वृत्रासुर का वध करके स्वर्ग पर पुनः अपना आधिपत्य स्थापित किया। वैदिक काल में गुरु और स्त्रियां योद्धाओं की रक्षा के लिए यह रक्षा सूत्र बांधती थीं।

3. भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी की कथा (Shri Krishna & Draupadi Katha):

महाभारत के प्रसंग के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र चलाया, तो उनकी तर्जनी अंगुली कट गई और उससे रक्त बहने लगा। पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने बिना एक पल की देरी किए अपनी रेशमी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्री कृष्ण की अंगुली पर बांध दिया। श्री कृष्ण ने द्रौपदी के इस निस्वार्थ प्रेम से द्रवित होकर उन्हें सदा अपनी बहन माना और संकट के समय रक्षा करने का वचन दिया। जब कौरवों की सभा में दुःशासन ने द्रौपदी का वस्त्रहरण करने का प्रयास किया, तो श्री कृष्ण ने अपनी बहन द्रौपदी की लाज बचाई और साड़ी की लंबाई बढ़ाकर उनकी रक्षा की।

4. महारानी कर्मावती और मुगल सम्राट हुमायूँ की ऐतिहासिक कथा (Rani Karnavati & Humayun History):

मध्यकालीन भारतीय इतिहास में रक्षाबंधन का एक अत्यंत भावुक प्रसंग मेवाड़ की महारानी कर्मावती और मुगल सम्राट हुमायूँ से जुड़ा है। जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया, तो विधवा महारानी कर्मावती के सामने अपने राज्य और नागरिकों की रक्षा का संकट खड़ा हो गया। महारानी कर्मावती ने हुमायूँ को अपना भाई मानते हुए एक राखी और रक्षा पत्र भेजा। हुमायूँ ने दूसरे धर्म का होते हुए भी राखी के पवित्र रिश्ते का सम्मान किया और अपनी सेना लेकर मेवाड़ की रक्षा के लिए निकल पड़ा। यह कथा सिद्ध करती है कि रक्षाबंधन धर्म, जाति और सीमाओं से परे जाकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को स्थापित करता है।

🔮 रक्षाबंधन 2026: 12 राशियों के भाइयों के लिए राखी का रंग व तिलक उपाय

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग की वैदिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार यदि बहनें अपने भाई की राशि के स्वामी ग्रह के अनुकूल रंग की राखी बांधती हैं, तो भाई के जीवन में ग्रह दोष शांत होते हैं और अपार सफलता मिलती है:

  1. मेष राशि (Aries): स्वामी ग्रह मंगल है। मेष राशि के भाइयों को लाल या गुलाबी रंग की राखी बांधें और कुमकुम का तिलक लगाएं। इससे भाइयों के पराक्रम और सफलता में वृद्धि होगी।
  2. वृषभ राशि (Taurus): स्वामी ग्रह शुक्र है। वृषभ राशि के भाइयों को सफेद, सिल्वर या चमकीली राखी बांधें और सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
  3. मिथुन राशि (Gemini): स्वामी ग्रह बुध है। मिथुन राशि के भाइयों को हरे रंग की राखी बांधें और हल्दी व अक्षत का तिलक लगाएं। इससे बुद्धि और व्यापार में प्रगति होगी।
  4. कर्क राशि (Cancer): स्वामी ग्रह चंद्रमा है। कर्क राशि के भाइयों को सफेद, रेशमी या मोती की राखी बांधें और रोली-अक्षत लगाएं। इससे मानसिक शांति की प्राप्ति होगी।
  5. सिंह राशि (Leo): स्वामी ग्रह सूर्य है। सिंह राशि के भाइयों को पीली, केसरिया या सुनहरी (गोल्डन) राखी बांधें और केसर का तिलक लगाएं। इससे मान-सम्मान बढ़ेगा।
  6. कन्या राशि (Virgo): स्वामी ग्रह बुध है। कन्या राशि के भाइयों को हरे या डार्क ग्रीन रंग की राखी बांधें और दुर्वा-अक्षत अर्पित करें। इससे आरोग्य का आशीर्वाद मिलेगा।
  7. तुला राशि (Libra): स्वामी ग्रह शुक्र है। तुला राशि के भाइयों को सफेद, क्रीम या नीले रंग की राखी बांधें और गोपी चंदन का तिलक लगाएं। इससे दांपत्य सुख बढ़ेगा।
  8. वृश्चिक राशि (Scorpio): स्वामी ग्रह मंगल है। वृश्चिक राशि के भाइयों को लाल या मैरून रंग की राखी बांधें और रोली का तिलक लगाएं। इससे शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
  9. धनु राशि (Sagittarius): स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है। धनु राशि के भाइयों को पीली या हल्दी के रंग की राखी बांधें और हरिद्रा तिलक लगाएं। इससे भाग्य चमकेगा।
  10. मकर राशि (Capricorn): स्वामी ग्रह शनि है। मकर राशि के भाइयों को नीली, बैंगनी या डार्क शेड की राखी बांधें और अक्षत-चंदन लगाएं। इससे कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी।
  11. कुंभ राशि (Aquarius): स्वामी ग्रह शनि है। कुंभ राशि के भाइयों को नीले या आसमानी रंग की राखी बांधें और रोली-अक्षत का तिलक लगाएं। इससे नए अवसर मिलेंगे।
  12. मीन राशि (Pisces): स्वामी ग्रह गुरु है। मीन राशि के भाइयों को पीली या केसरिया रंग की राखी बांधें और केसर-चंदन का तिलक लगाएं। इससे आध्यात्मिक उन्नति होगी।

🌿 श्रावणी उपाकर्म व ऋषितर्पण (Shravani Upakarma Significance)

श्रावण पूर्णिमा के पावन दिन केवल रक्षाबंधन ही नहीं, बल्कि वैदिक सनातन परंपरा में श्रावणी उपाकर्म (Upakarma) तथा संस्कृत दिवस (Sanskrit Diwas) भी बड़े श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। इस दिन द्विज वर्ग (ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य) वर्षभर जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित हेतु नदी के तट पर स्नान करके पंचगव्य प्राशन करते हैं और पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) उतारकर नया पवित्र जनेऊ धारण करते हैं।

इसके पश्चात सप्तऋषियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि व वशिष्ठ) तथा पितरों का जल-तर्पण किया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि श्रावणी उपाकर्म से वेदों का अध्ययन पुनः शुद्ध होता है और साधक को आरोग्य, ज्ञान व ब्रह्मतेज की प्राप्ति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ – Raksha Bandhan 2026)

1. रक्षाबंधन 2026 में राखी बांधने की सही तारीख क्या है?

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार 2026 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को उदया तिथि श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा।

2. रक्षाबंधन 2026 में राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त कब है?

28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को प्रातः सूर्योदय 05:56 AM से प्रातः 09:48 AM (उदया तिथि पूर्णिमा काल) तक राखी बांधने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।

3. क्या 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर भद्रा काल का साया रहेगा?

नहीं, भद्रा काल 27 अगस्त की रात्रि में ही समाप्त हो जाएगा। अतः 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबंधन का पूरा दिन भद्रामुक्त और अत्यंत शुभ रहेगा।

4. रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधी जाती?

शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल उग्र और विनाशकारी माना गया है। भद्रा काल में बांधी गई राखी से कुल का अनिष्ट होता है, इसलिए भद्रा काल में राखी बांधना पूरी तरह वर्जित है।

5. राखी बांधते समय कौन सा वैदिक मंत्र बोलना चाहिए?

राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

6. भाई को राखी बांधते समय किस दिशा में बैठाना चाहिए?

भाई को हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर मुंह करके बैठाना चाहिए। खाली सिर कभी तिलक न लगाएं, सिर पर रुमाल या वस्त्र अवश्य रखें।

7. राखी की थाली में कौन-कौन सी पूजा सामग्री होनी चाहिए?

थाली में रोली/कुमकुम, अक्षत (अखंडित चावल), पीला चंदन, गाय के घी का दीपक, नारियल (श्रीफल), मिठाई और पवित्र रक्षा सूत्र (राखी) होनी चाहिए।

8. क्या बहनों को सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करनी चाहिए?

जी हाँ, रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने से पूर्व भगवान श्री गणेश, भगवान विष्णु और अपने इष्टदेव को राखी अर्पित करने से पर्व पूरी तरह सिद्ध होता है।

9. श्रावणी उपाकर्म क्या होता है और इसका रक्षाबंधन से क्या संबंध है?

श्रावण पूर्णिमा के दिन वैदिक परंपरा में द्विज वर्ग द्वारा नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया जाता है और ऋषियों का तर्पण किया जाता है, जिसे श्रावणी उपाकर्म कहा जाता है।

10. रक्षाबंधन पर भाइयों को किस रंग की राखी बांधना शुभ माना जाता है?

भाई की राशि के स्वामी ग्रह के अनुसार राखी का रंग चुनना अत्यंत शुभ होता है; जैसे मेष/वृश्चिक के लिए लाल, सिंह/धनु के लिए पीली, मिथुन/कन्या के लिए हरी।

11. क्या शादीशुदा बहनें अपने भाई के घर जाकर राखी बांध सकती हैं?

जी हाँ, शास्त्रों में विवाह के पश्चात भी बहन के भाई के घर जाकर रक्षा सूत्र बांधने और परिवार के मंगल की कामना करने का विधान है।

12. क्या भाई बहन को उपहार में नारियल दे सकता है?

जी हां, श्रीफल (नारियल) माता लक्ष्मी का प्रतीक है और रक्षाबंधन पर बहन को नारियल व उपहार भेंट करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

13. यदि भाई दूर रहता है, तो राखी कैसे भेजें?

यदि भाई दूर है तो बहनें पूर्णिमा तिथि के शुभ मुहूर्त से पूर्व डाक द्वारा राखी भेज सकती हैं और भाई शुभ मुहूर्त में स्वयं तिलक लगाकर राखी बांध सकते हैं।

14. रक्षाबंधन पर किस रंग के कपड़े पहनना चाहिए?

रक्षाबंधन के दिन लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के पारंपरिक वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। काले कपड़ों से परहेज करें।

15. बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग में रक्षाबंधन का क्या विशेष महत्व है?

पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग में रक्षाबंधन की तिथि, भद्रा काल की समाप्ति और चौघड़िया मुहूर्त का सूक्ष्म खगोलीय विश्लेषण दिया गया है, जो उत्तर भारत में 100% प्रामाणिक माना जाता है।

📅 रक्षाबंधन 2026 विशेषांक (बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग)

🛑 निष्कर्ष (Conclusion)

Raksha Bandhan 2026 केवल धागे का त्यौहार नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भाई-बहन के प्रेम और आध्यात्मिक सुरक्षा का महान पर्व है। पंडित बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को भद्रामुक्त शुभ मुहूर्त में शास्त्रोक्त विधि से रक्षा सूत्र बांधकर आप अपने परिवार में सुख, समृद्धि, सुरक्षा और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

(अस्वीकरण / Note: यह लेख बाबू लाल चतुर्वेदी पंचांग एवं धर्मग्रंथों की शास्त्रीय मान्यताओं पर आधारित है। अपने कुल की परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करें।)

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